कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य आहितः।

गोजिद् भूयासमश्‍वजिद् धनंजयो हिरण्यजित्॥ (अथर्ववेद 6.50.8)
अर्थात मेरे दाएँ हाथ में कर्म और बाएँ हाथ में विजय है। मैं अपने साहस और बल से, परिश्रम और शक्ति से गौओं, इन्द्रियों या भूमि पर विजय प्राप्त कर लूँगा। मैं घोड़ों को जीत लूँगा। मैं संसार की सम्पतित्यों पर अपना अधिकार जमा लूँगा और मैं विश्‍व की खानों में विद्यमान सोने और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं पर अधिकार कर लूँगा।
एक बार एक शेर का बच्चा जंगल में अकेला खेल रहा था। उसकी माँ सो रही थी। बच्चा इधर-उधर भटक गया। वह रोने लगा। सामने आती हुई भेड़ ने उसे देखा। उसके बच्चे मर चुके थे। उसके हृदय में ममता उमड़ी। भेड़ ने उसको पाला- पोसा। वह भेड़ से भी बड़ा हो गया। एक दिन अचानक उस जंगल में एक बड़ा शेर आया, सामने की पहाड़ी पर खड़े होकर गरजा। उसकी आवाज ने उसके स्वभाव के उस वीरत्व को झंझोड़ कर जगा दिया और उसने अनुभव किया कि उसमें एक ऐसी महान शक्ति छिपी है जिसका आज तक उसे पता न था। वह एक ही छलाँग में शेर के पास जा पहुँचा। शेर की दहाड़ ने उसके सोए वीरत्व को जगा दिया। वह भेड़ का जीवन छोड़कर सिंह बन गया। अब उसे चाहिए था- सिंह का जीवन, स्वच्छन्द विचरण और वन का विशाल राज्य।
ठीक इसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य में उसका पुरुषत्व छिपा रहता है। संसार में विजय प्राप्त करने के लिए अपने भीतर के महान व्यक्तित्व को जाग्रत कीजिए, जीवन की योजना बनाइए और विजय की ओर बढ़िए। अवश्य विजय होगी।
उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द का जीवन विपत्तियों एवं अर्थाभाव की एक जीवित जागृत कहानी है। साहित्य के इस महान पुजारी को धन की कठिनाइयों में पड़कर अपना नया कोट तक बेचना पड़ा। चार-चार मील पान्डेपुर तक पैदल आना-जाना पड़ा। परन्तु उस कर्मवीर ने हिम्मत न हारी, संघर्ष करता हुआ अपनी साधना में लगा रहा। आज उसकी रचनाएँ विश्‍व साहित्य के शिखर पर हैं। उनका मन्त्र था, कार्य करो, आगे बढ़ो और विजय प्राप्त करो।
जीवन में पराजय उनको मिलती है, जो निराश हो जाते हैं और अपनी शक्ति की उपेक्षा करते हैं। इसीलिए कुछ विद्वानों ने हतोत्साह होने वाले को मानवजाति का सबसे बड़ा शत्रु कहा है। जब आप जीवन में विजय प्राप्त करने के लिए बढ़ रहे हों तो दृढ़ संकल्प कीजिए कि उसे अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगाकर पूरा करेंगे।
शिकागो ग्रैंड ट्रंक रेलवे के प्लेटफार्म पर एक लड़का सवेरे से शाम तक अपनी जीविका के लिए अखबार बेचा करता था। वह परिश्रमी, उत्साही और लगनशील था। उसने वर्णमाला सीखी। अखबार बेचने के बाद पढ़ने लगा। पुस्तकों में उसकी अभिरुचि बढ़ी और एक रसायनशाला में जाकर उसने आविष्कार कर डाला। एक निर्जीव पदार्थ में आवाज भरकर उसे फिर से निकाल लेना ही उसका अविष्कार है। विज्ञान के संसार में विजयी होने वालों में उसका आविष्कार है। विज्ञान के संसार में विजयी होने वालों में उसका नाम अमर है थॉमस अल्वा एडिसन।
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन निर्धन लकड़हारे के बेटे थे। निर्धनता के बीच इस लकड़हारे के बेटे ने अपनी आन्तरिक शक्ति का विकास किया। दिन में मजदूरी और रात में अध्ययन। उन्होंने स्वयं शिक्षा प्राप्त की, दासों को शिक्षित किया और अन्त में दास प्रथा को समूल नष्ट कर दिया। इतना ही नहीं, अपने जीवन में बोझा ढोने वाला, मेज-कुर्सियाँ साफ करने वाला, दासों के साथ भूखा रहने वाला, पेड़ों की छाया में अध्ययन करने वाला यही व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन हुआ।
वेद में एक मन्त्र आया है-
अहमिन्द्रो न पराजिग्ये।
अर्थात मैं इन्द्र हूँ और मैं कभी पराजित नहीं हो सकता। आप अवश्य जीतेंगे, अवश्य विजयी बनेंगे। सफलता और असफलता मनुष्य के हाथ की वस्तु है। इससे न भाग्य का सम्बन्ध है, न ईश्‍वर का सम्बन्ध है। असफलता तो कर्महीनों के हाथ लगती है, कर्मवीरों के चरणों को सफलता चूमती है। योगी कवि ने कहा है-
सन्मुख था तूफानी सागर, कूद गया मैं दृढ़ निश्‍चय कर,
मैं असफल हो लौटूँ, इससे अच्छा लहरों के बीच समाऊँ।
अथर्ववेद के 8.8.24 के मन्त्र में कहा गया है-
इतो जयेतो वि जय सं जय जय स्वाहा।
इमे जयन्तु परामी जयन्तां स्वाहैभ्यो दुराहामीभ्यः॥
अर्थात हे वीर, इधर जय प्राप्त कर। उधर जय प्राप्त कर, कमाल की विजय हासिल कर। जीत, जीत हर क्षेत्र में जीत, शाबाश! विजयी बन, संसार में तेरी कीर्ति का गान हो और तेरा यश फैले ! हमारे योद्धा विजयी हों! शत्रु पराजित हों! इन योद्धाओं को कीर्ति प्राप्त हो! शत्रुओं का अपयश हो!
विजय हमारा चरम लक्ष्य हो!
विजय हमारा जीवन हो!
जिस पथ पर हम बढ़ते जाएँ
अर्पित अपना तन-मन हो। - राजेश प्रताप सिंह

 

जीवन जीने की सही कला जानने एवं वैचारिक क्रान्ति और आध्यात्मिक उत्थान के लिए
वेद मर्मज्ञ आचार्य डॉ. संजय देव के ओजस्वी प्रवचन सुनकर लाभान्वित हों।
यज्ञ में एक ही मन्त्र से पांच आहुतियाँ क्यों
Ved Katha Pravachan - 31 (Explanation of Vedas) वेद कथा - प्रवचन एवं व्याख्यान Ved Gyan Katha Divya Pravachan & Vedas explained (Introduction to the Vedas, Explanation of Vedas & Vaidik Mantras in Hindi) by Acharya Dr. Sanjay Dev

 

Hindu Vishwa | Divya Manav Mission | Vedas | Hinduism | Hindutva | Ved | Vedas in Hindi | Vaidik Hindu Dharma | Ved Puran | Veda Upanishads | Acharya Dr Sanjay Dev | Divya Yug | Divyayug | Rigveda | Yajurveda | Samveda | Atharvaveda | Vedic Culture | Sanatan Dharma | Indore MP India | Indore Madhya Pradesh | Explanation of  Vedas | Vedas explain in Hindi | Ved Mandir | Gayatri  Mantra | Mantras | Pravachan | Satsang  | Arya Rishi Maharshi | Gurukul | Vedic Management System | Hindu Matrimony | Ved Gyan DVD | Hindu Religious Books | Hindi Magazine | Vishwa Hindu | Hindi vishwa | वेद | दिव्य मानव मिशन | दिव्ययुग | दिव्य युग | वैदिक धर्म | दर्शन | संस्कृति | मंदिर इंदौर मध्य प्रदेश | आचार्य डॉ. संजय देव

Add comment


Security code
Refresh

Divya Manav Mission India